दस लक्षण पर्व के सातवें दिनआत्मा की शुद्धि के लिए मनाया आज उत्तम तप धर्म
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) जैन दर्शन के दस लक्षण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप, धर्म व आत्मा की शुद्धि के लिए किया जाने वाला एक परम तप पूर्ण श्रद्धा भाव से कस्बे के आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मनाया गया ।
प्रातः जैन मंदिर में भगवान का अभिषेक किया गया। विश्व कल्याण एवं समाज के लिए शांति धारा एवं विशेष पूजा अर्चना की गई।
आज के उत्तम तब धर्म में इच्छाओं का निरोध, शरीर, वाणी और मन का अनुशासन तथा कर्मों को नाश करने का प्रयास शामिल होता है। यह आंतरिक तप पर केंद्रित है। जो सच्ची श्रद्धा और अहिंसा के साथ जैन धर्म के अनुयायियों द्वारा किया गया ।
सुमत चंद जैन ने बताया कि तप शब्द आत्मा के शत्रुओं पर विजय पाना है। तप में नैतिक गुणों का विकास भी शामिल है। जिसके लिए आत्म संयम और अनुशासन की आवश्यकता होती है। जैसे धैर्य और सहनशीलता इसे आध्यात्मिक विकास का एक महत्वपूर्ण घटक माना जाता है जिसमें दोषों की पहचान और सद्गुणों के विकास के लिए विभिन्न प्रकार के अभ्यास शामिल हैं । तप की महिमा अपार है। तपस्या से मनुष्य तेजस्वी होता है, बलवान होता है।
आत्मा की शुद्धि: जिस तरह सोना अग्नि में तपकर शुद्ध होता है, उसी तरह तप की अग्नि से आत्मा के कर्म मैल दूर होते हैं और वह निर्मल बनती है। दस लक्षण पर्व के आज सातवें दिन उत्तम तप धर्म मंदिरजी में विशेष पूजा पाठ कर मनाया गया।

