लक्ष्मणगढ़ में श्रद्धा व उल्लास से मनी जलझूलनी एकादशी: बालकृष्ण को कराया जल विहार, धूमधाम से निकली डोल यात्रा
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) द्रपद शुक्ल एकादशी के पावन अवसर पर लक्ष्मणगढ़ कस्बे में जलझूलनी एकादशी (डोल ग्यारस/परिवर्तिनी एकादशी) श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। कस्बे के वैष्णव मंदिरों में भगवान विष्णु के वामन अवतार और बालकृष्ण स्वरूप का विशेष पूजन-अर्चन कर नगर भ्रमण कराया गया।
शोभायात्रा और जल विहार
सैनी मोहल्ले स्थित बाबाजी के प्राचीन मंदिर से भगवान के विग्रह को नयनाभिराम रूप से सजाकर पालकी में विराजमान किया गया। घंटे-घड़ियाल और शंखध्वनि के बीच शोभायात्रा नगर भ्रमण करते हुए रोनिजा रोड स्थित बांध की पाल पर पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ठाकुरजी को जल विहार व स्नान कराकर जल पूजन संपन्न हुआ।
रास्ते में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पालकी रोककर भगवान श्रीजी के दर्शन किए और फल-भोग अर्पित किए। पूरा वातावरण ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गुंजायमान रहा। इसके अलावा कठूमर रोड स्थित वैष्णो मंदिर और मुख्य बाजार स्थित दाऊजी मंदिर से भी भव्य डोल यात्राएं निकाली गईं। शहरभर में भजन-कीर्तन का दौर देर शाम तक जारी रहा।
धार्मिक मान्यताएं
- यशोदा माता का जलवा पूजन: स्थानीय पंडित लोकेश कुमार के अनुसार, जन्माष्टमी के बाद इसी दिन माता यशोदा ने बाल गोपाल का पहली बार जलवा पूजन (कुआं पूजन) किया था और उनके वस्त्र धोए थे। इसी परंपरा के तहत ठाकुरजी को जल स्रोत पर ले जाकर स्नान कराया जाता है।
- परिवर्तिनी एकादशी का महत्व: मान्यता है कि चतुर्मास के दौरान क्षीर सागर में शयन कर रहे भगवान विष्णु आज के दिन करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी या पद्मा एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन व्रत, दान-पुण्य और श्रीहरि की उपासना करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

