'डबल डॉक्टरेट' मुक्केबाज डॉ. जुबेर खान का ऐतिहासिक संघर्ष लाया रंग, अलवर में पहली बार हो रही राज्य स्तरीय स्कूली बॉक्सिंग प्रतियोगिता
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) प्रारंभिक शिक्षा विभाग के तत्वावधान में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चौकी शेख सराय (अलवर) द्वारा इंदिरा गांधी स्टेडियम में 70वीं राज्य स्तरीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता का शानदार आगाज हो चुका है। इस स्पर्धा का समापन 4 अक्टूबर को होगा। लेकिन अलवर जिले में पहली बार हो रहे इस ऐतिहासिक आयोजन के पीछे लक्ष्मणगढ़ तहसील के ग्राम खरसनकी निवासी और प्रदेश के वरिष्ठ बॉक्सर डॉ. जुबेर खान का वह लंबा संघर्ष छिपा है, जिसकी बदौलत आज बॉक्सिंग को राज्य के स्कूल खेलों में आधिकारिक जगह मिल सकी है।
- राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक लगाई थी गुहार
राज्य के स्कूल खेलों की सूची में बॉक्सिंग को शामिल कराने के लिए डॉ. जुबेर खान ने जमीनी स्तर से लेकर प्रशासनिक स्तर तक लंबी लड़ाई लड़ी। उन्होंने राज्य के युवाओं और उभरते मुक्केबाजों को मंच दिलाने के लिए देश के सर्वोच्च पदों— राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री तक अपनी आवाज पहुंचाई। उनके इसी अथक प्रयास और ऐतिहासिक संघर्ष का परिणाम है कि बॉक्सिंग को स्कूल खेलों की आधिकारिक सूची में शामिल किया गया। इसी सफलता के चलते आज अलवर जिले को पहली बार स्कूल खेलों की राज्य स्तरीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता की मेजबानी का अवसर मिला है, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में भारी उत्साह है।
- प्रदेश के इकलौते 'डबल डॉक्टरेट' मुक्केबाज हैं डॉ. खान
डॉ. जुबेर खान की पहचान केवल बॉक्सिंग रिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका सफर अद्वितीय है। वे प्रदेश के इकलौते ऐसे मुक्केबाज हैं, जिनके पास 'डबल डॉक्टरेट' की उपाधि है। उन्होंने फिजिकल एजुकेशन (बॉक्सिंग) में पीएचडी करने के साथ-साथ योगा एजुकेशन में भी डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की है।
इसके अलावा, वे अलवर जिले के पहले ऐसे मुक्केबाज हैं जिन्होंने स्पोर्ट्स कोचिंग के अंतर्गत बॉक्सिंग में पोस्ट ग्रेजुएट (PG) डिप्लोमा किया है। डॉ. खान की यह उपलब्धि खेल और उच्च शिक्षा के दुर्लभ संगम को दर्शाती है, जो आज प्रदेश के हजारों स्कूली बच्चों और युवा खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई है।

