स्कूलों से केवलादेव तक बच्चों को प्रकृति संरक्षण से जोड़ रहा केवलादेव मित्र कार्यक्रम
भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान अब भरतपुर के स्कूली बच्चों को केवल भ्रमण तक सीमित न रखते हुए उन्हें प्रकृति एवं आर्द्रभूमि संरक्षण का सहभागी बनाने की दिशा में पहल कर रहा है। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय उद्यान द्वारा ‘केवलादेव मित्र कार्यक्रम’ प्रारम्भ किया गया है। कार्यक्रम के प्रथम चरण में फरवरी 2027 तक भरतपुर के करीब 25 विद्यालयों को इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 4 विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित किया जा चुका है, जहां विद्यार्थियों एवं विद्यालय प्रशासन की ओर से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है।
उपवन संरक्षक बीवी चेतन कुमार ने बताया कि कार्यक्रम के तहत विद्यालयों में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों एवं फील्ड स्टाफ द्वारा विद्यार्थियों के साथ संवाद कर उन्हें आर्द्रभूमियों के महत्व, केवलादेव की विशिष्ट जैव विविधता, पक्षियों एवं वन्यजीवों तथा संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी जा रही है।
प्रत्येक सहभागी विद्यालय को केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान का जैव विविधता मानचित्र उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही विद्यालयों में ईको-क्लब को सक्रिय कर पक्षी अवलोकन, प्रकृति भ्रमण, क्विज, चित्रकला, फोटोग्राफी एवं विभिन्न संरक्षण गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
कार्यक्रम के तहत प्रत्येक विद्यालय में विद्यार्थियों एवं पार्क कार्मिकों की सहभागिता से कदम्ब का पौधा भी लगाया जाएगा, ताकि बच्चों का संरक्षण से प्रत्यक्ष जुड़ाव हो और यह पौधा उनके लिए केवलादेव से जुड़े एक जीवंत प्रतीक के रूप में विकसित हो।
एसीएफ रेखा वर्मा ने बताया कि कार्यक्रम का अगला महत्वपूर्ण चरण विद्यार्थियों का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में शैक्षणिक भ्रमण होगा। इस दौरान विद्यार्थी आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र, पक्षियों एवं अन्य वन्यजीवों को प्रत्यक्ष रूप से देखेंगे और उद्यान में किए जा रहे संरक्षण कार्यों को समझेंगे। उन्होंने बताया कि दीर्घकाल में प्रत्येक सहभागी विद्यालय से प्रकृति एवं पक्षी संरक्षण में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को चिन्हित कर ‘केवलादेव वेटलैंड चौंपियन’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन विद्यार्थियों को पार्क के साथ निरंतर जोड़ा जाएगा तथा प्रतिवर्ष फरवरी में आयोजित भरतपुर बर्ड फेस्टिवल के दौरान सम्मानित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि केवलादेव मित्र कार्यक्रम का उद्देश्य जागरूकता के एक-दिवसीय कार्यक्रम से आगे बढ़कर विद्यालयों और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के बीच स्थायी संरक्षण संबंध स्थापित करना है। इसके माध्यम से भरतपुर के बच्चों को भविष्य के ‘युवा संरक्षण दूत’ के रूप में तैयार किया जाएगा, जो केवलादेव ही नहीं बल्कि जिले की आर्द्रभूमियों और जैव विविधता के संरक्षण में भी अपनी भूमिका निभा सकें।

