संत दुर्बलनाथ जी महाराज की 165वीं जयंती: जन्मस्थली बिचगांवा में धूमधाम से निकली भव्य शोभायात्रा, झांकियां रहीं आकर्षण का केंद्र
लक्ष्मणगढ़, (अलवर/कमलेश जैन)। खटीक समाज के कुलगुरु, राष्ट्रीय संत शिरोमणि दुर्बलनाथ जी महाराज की पावन जन्मस्थली ग्राम बिचगांवा में उनकी 165वीं जयंती मंगलवार को श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाई गई। इस अवसर पर गांव में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें आकर्षक झांकियों के साथ बड़ी संख्या में समाज के महिला, पुरुष व बच्चों ने भाग लिया।
- शोभायात्रा व सांस्कृतिक आयोजन
समारोह के तहत आयोजित विशाल शोभायात्रा में संत दुर्बलनाथ जी के जीवन और उनके आदर्शों से जुड़ी विभिन्न सजीव झांकियां सजाई गईं। शोभायात्रा गांव के प्रमुख मार्गों से गुजरी, जहां ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। कार्यक्रम के तहत रात्रि में भव्य सत्संग और सांस्कृतिक समारोह का आयोजन भी निर्धारित किया गया, जिसमें गायक कलाकारों द्वारा संत दुर्बलनाथ जी की महिमा का गुणगान किया जाएगा।
- सत्य, समानता और शिक्षा की जगाई अलख
समारोह में उपस्थित समाज के प्रबुद्धजनों ने संत दुर्बलनाथ जी के मानवता, सामाजिक एकता और भाईचारे के संदेशों को याद किया। समाज बंधुओं ने बताया कि 19वीं सदी में बिचगांवा की धरा पर जन्मे संत दुर्बलनाथ जी ने समाज में व्याप्त कुरीतियों को मिटाकर सत्य, समानता, शिक्षा और परोपकार की नई राह दिखाई।
- बांदीकुई है मुख्य तपोभूमि व तीर्थ
समाज के प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि संत दुर्बलनाथ जी का मुख्य और सुप्रसिद्ध मंदिर दौसा जिले के बांदीकुई कस्बे में स्थित है। वहां प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर विशाल लक्खी मेले व महोत्सव का आयोजन होता है, जिसमें देशभर से लाखों श्रद्धालु दर्शनार्थ पहुंचते हैं।
आयोजन में समाज के पवन नागर, रामेश्वर खींची, रतन सिंह गंगवाल, लहरी राम नागर सहित समाज के अनेक गणमान्य लोग, मातृशक्ति व युवा उपस्थित रहे।

