सहानुभूति नहीं, सेवा की मिसाल: लक्ष्मणगढ़ में घायल बछड़े के उपचार के लिए आगे आए स्थानीय दुकानदार
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/ कमलेश जैन) जाति, धर्म और गो-सेवा के नाम पर बातें करने वालों की कमी नहीं है, लेकिन धरातल पर मूक पशुओं के दर्द को महसूस करने वाले लोग कम ही नजर आते हैं। कस्बे के मालाखेड़ा रोड, पाराशर मोहल्ले के पास ऐसा ही एक मानवीय उदाहरण देखने को मिला, जहां स्थानीय दुकानदारों ने मिलकर एक घायल और बेसहारा बछड़े को नया जीवन देने की पहल की।
- सप्ताह भर से तड़प रहा था गोवंश
मिली जानकारी के अनुसार, पैर में गंभीर चोट लगने के कारण एक बछड़ा पिछले लगभग एक सप्ताह से सड़क किनारे लाचार अवस्था में तड़प रहा था। सैकड़ों राहगीर वहां से गुजरे, लेकिन किसी ने भी उस घायल पशु की सुध नहीं ली।
- दुकानदारों ने संभाला मोर्चा
जब पास के दुकानदारों की नजर इस असहाय बछड़े पर पड़ी, तो उन्होंने प्रशासन या किसी संस्था का इंतजार किए बिना स्वयं ही उसके उपचार का बीड़ा उठाया। स्थानीय नागरिक दिनेश कुमार, रामेश्वर खींची और मनीष विजय ने तुरंत दवाइयों और पट्टी की व्यवस्था की और प्राथमिक उपचार शुरू किया।
- लगातार तीन दिन से जारी है सेवा
दुकानदारों द्वारा पिछले तीन दिनों से नियमित रूप से घाव की सफाई कर दवा लगाई जा रही है और पट्टी बांधी जा रही है। निरंतर की जा रही देखभाल से बछड़े के घाव में अब काफी सुधार देखा गया है। सेवा में जुटे युवाओं का कहना है कि जब तक बछड़ा पूरी तरह स्वस्थ होकर चलने-फिरने नहीं लगेगा, तब तक उनकी यह सेवा निरंतर जारी रहेगी।

