अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस का मंथन: ठेकेदारी प्रथा खत्म कर नियमितीकरण की उठी पुरजोर मांग
भोपाल/भीलवाड़ा (राजकुमार गोयल)। अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में संपन्न हुई। राष्ट्रीय अध्यक्ष चरण सिंह टांक की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में देशभर से आए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सफाई कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं पर गहन विचार-विमर्श किया।
राजस्थान प्रदेश महामंत्री छीतर मल गेगट ने जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में सफाई कर्मचारियों के हक और अधिकारों से जुड़े कई प्रमुख प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।
बैठक में उठीं मुख्य मांगें:
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ठेकेदारी प्रथा का अंत और नियमितीकरण: निकाय व सरकारी विभागों में सफाई कार्य में चल रही ठेकेदारी प्रथा को तुरंत बंद किया जाए तथा विनियमित (अस्थायी/संविदा) सफाई कर्मियों को नियमित किया जाए।
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लाड एवं वामे समिति और आरक्षण लागू हो: महाराष्ट्र की तर्ज पर 'लाड एवं वामे समिति' की सिफारिशों को देश के सभी राज्यों में लागू करने तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुसूचित जाति आरक्षण के उप-वर्गीकरण संबंधी निर्णय को अमल में लाने की मांग की गई।
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भर्ती और न्यूनतम वेतन: देशभर में 1 लाख से अधिक सफाई कर्मचारियों की स्थायी भर्ती की जाए। जब तक ठेकेदारी व्यवस्था जारी है, तब तक कर्मियों को न्यूनतम वेतन अधिनियम के तहत भुगतान मिले।
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आवास और रोजगार सुरक्षा: सभी सफाई कर्मचारियों को निःशुल्क आवास तथा उनके शिक्षित बच्चों को सरकारी योजनाओं, विशेष प्रशिक्षण व उद्योग स्थापना में प्राथमिकता देकर रोजगार सुनिश्चित किया जाए।
जंतर-मंतर पर बड़े आंदोलन का ऐलान: प्रदेश महामंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि केंद्र व राज्य सरकारों ने इन मांगों पर जल्द सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर विशाल देशव्यापी प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। बैठक में राष्ट्रीय व प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों ने सफाई कर्मियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहकर संघर्ष करने का संकल्प लिया।

