जलझूलनी एकादशी पर कृष्ण रंग में रंगा मेवाड़: 'एक सेठ, दो नाथ और ठाकुर जी' ने किए शाही जलविहार; हाथी घोड़ा पालकी' के जयकारों से गूंजी अरावली की धरा
मेवाड़ (सत्यनारायण सेन) भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पावन जलझूलनी एकादशी (डोल ग्यारस) के अवसर पर आज समूचा मेवाड़ अंचल कृष्ण भक्ति के अनूठे रंग में सराबोर हो उठा है। क्षेत्र के ऐतिहासिक और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र मंदिरों से भगवान के रजत बेवाण (शाही पालकी) गाजे-बाजे के साथ नगर भ्रमण पर निकले। जन-जन के आराध्य देवों ने नगर का रुख किया, जहां भक्तों ने पलक-पावड़े बिछाकर ठाकुर जी का स्वागत किया। संध्या काल में सभी देव प्रतिमाओं को पवित्र जलाशयों के घाट पर ले जाकर पारंपरिक रूप से 'जल स्नान' (नौका विहार व झूला) कराया गया।
आइए जानते हैं मेवाड़ के तीन जिलों चित्तौड़गढ़, राजसमंद और भीलवाड़ा जिले के इस पावन धरा के उन चार दिव्य देव-स्थानों में एक सेठ दो नाथ और एक ठाकुर जी की अनूठी खूबियां, जिनकी महिमा के आगे आज पूरा राजस्थान नतमस्तक है:
- 1. मंडफिया के सांवरिया सेठ (चित्तौड़गढ़) 'मेवाड़ के राजा और भक्तों के व्यापारिक साझीदार'
खूबी और महिमाः चित्तौड़गढ़ के मंडफिया में विराजमान श्री सांवरिया सेठ को कृष्ण भक्तों का "बिजनेस पार्टनर" माना जाता है। मान्यता है कि यहां भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर अपने व्यापार का एक हिस्सा सांवरिया सेठ के नाम कर देते हैं। इस मंदिर का भंडार जब भी खुलता है, देश-विदेश की मुद्राएं और करोड़ों का सोना-चांदी निकलता है।
आज का आकर्षणः आज जलझूलनी एकादशी पर सांवरिया सेठ को विशेष स्वर्णिम पोशाक और हीरों के आभूषणों से सजाया गया। जब सेठ जी का बेवाण निकला, तो उनके दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
- 2. गढबोर के चारभुजा नाथ (राजसमंद) - 'मेवाड़ के प्रधान रक्षक'
खूबी और महिमाः राजसमंद के अरावली की पहाड़ियों के बीच बसे गढ़बोर के चारभुजा नाथ का इतिहास महाभारत कालीन माना जाता है। पांडवों द्वारा पूजे गए इस विग्रह की मेवाड़ राजवंश से लेकर आम जनता तक गहरी आस्था है। इन्हें मेवाड़ का मुख्य रक्षक और सारथी माना जाता है।
आज का आकर्षणः गढ़बोर में आज का डोल मेला देखते ही बन रहा है। ठाकुर जी के गर्भगृह से बाहर आते ही पूरा परिसर "हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की" के जयकारों से गूंज उठा। भगवान को दूध-गंगा के पवित्र जल से स्नान कराया गया।
- 3. कोटडी के श्याम (भीलवाड़ा) - 'चमत्कारी कोटड़ी के नाथ'
खूबी और महिमाः भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी कस्बे में स्थित चारभुजा नाथ (कोटड़ी के श्याम) अपनी अलौकिक शक्ति और न्यायप्रियता के लिए जाने जाते हैं। भक्त अपनी हर छोटी-बड़ी समस्या के निवारण और न्याय की गुहार लगाने कोटड़ी दरबार में आते हैं। यहां के चमत्कार देश भर में प्रसिद्ध हैं।
आज का आकर्षणः कोटडी के नाथ आज चांदी के भव्य रथ में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले। रास्ते भर भक्तों ने अबीर-गुलाल उड़ाकर और पुष्पवर्षा कर भगवान की अगवानी की।
- 4. गुरला के लक्ष्मीनाथ जी ठाकुर जी (भीलवाड़ा) 'शांति और अटूट लोक-आस्था के प्रतीक'
खूबी और महिमाः भीलवाड़ा के ऐतिहासिक गांव गुरला में विराजमान श्री लक्ष्मीनाथ जी ठाकुर जी (चारभुजा नाथ) इस क्षेत्र की आत्मा हैं। मंदिर की प्राचीन वास्तुकला और शांत वातावरण भक्तों को अध्यात्म की गहराई का अहसास कराता है। गुरला और आसपास के ग्रामीणों के लिए लक्ष्मीनाथ जी सुख-समृद्धि के विधाता हैं। कोई भी शुभ कार्य इनकी अनुमति के बिना शुरू नहीं होता।
आज का आकर्षणः गुरला के लक्ष्मीनाथ जी का आज विशेष मनोहारी शृंगार किया गया। नगर भ्रमण के दौरान गुरला की सड़कों पर लोक कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए। इसके बाद जब लक्ष्मीनाथ जी जलाशय के तट पर जलविहार के लिए पहुंचे, तो महाआरती के विहंगम दृश्य ने सभी को भाव-विभोर कर दिया।
- भक्ति और संस्कृति का अनूठा समागम
जलझूलनी एकादशी का यह पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मेवाड़ की समृद्ध लोक-संस्कृति, आपसी भाईचारे और अटूट श्रद्धा का जीवंत प्रमाण है। आज इन चारों धामों में उमड़ा भक्तों का सैलाब यह साबित करता है कि बदलते दौर में भी सनातन संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी और अटूट हैं।

