संयम और तप की सुगंध से महका मंदिर: लक्ष्मणगढ़ में भक्तिभाव के साथ मनाई गई अनंत चतुर्दशी, दशलक्षण महापर्व का हुआ समापन
लक्ष्मणगढ़ जैन समाज ने धूमधाम से मनाई अनंत चतुर्दशी: दशलक्षण पर्व के अंतिम दिन हुई 'उत्तम ब्रह्मचर्य' की विशेष आराधना
लक्ष्मणगढ़ (अलवर) कमलेश जैन
कस्बे के श्रीआदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में शुक्रवार को जैन धर्म का पावन पर्व 'अनंत चतुर्दशी' अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इसके साथ ही दस दिनों तक चलने वाले आत्म-साधना के महापर्व 'दशलक्षण' का समापन हो गया।
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की हुई आराधना
दशलक्षण पर्व के दसवें एवं अंतिम दिन दशलक्षण धर्म के दसवें लक्षण 'उत्तम ब्रह्मचर्य' की विशेष पूजा-अर्चना की गई। प्रातः काल श्रावकों ने नियम-संयम के साथ जिनेन्द्र भगवान का जलाभिषेक कर पूरे विश्व के कल्याण की प्रार्थना की। तत्पश्चात शांतिधारा और विशेष पूजन के विधान संपन्न हुए। सायं काल में भव्य आरती व कलशाभिषेक का विशेष आयोजन किया गया।
अनंत चतुर्दशी का विशेष धार्मिक महत्व
जैन मान्यता के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी का दिन जैन समाज के लिए अत्यंत पवित्र है। इसी पावन तिथि को जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य को मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त हुआ था। दिगंबर जैन समाज द्वारा भाद्रपद के अंतिम 10 दिनों में दशलक्षण महापर्व की विशेष साधना की जाती है।
27 सितंबर को मनाया जाएगा 'क्षमावाणी' पर्व
दशलक्षण महापर्व के समापन के उपरांत, प्रतिपदा (पड़वा) यानी 27 सितंबर को समाज द्वारा 'क्षमावाणी पर्व' मनाया जाएगा। इस दिन जैन समाज के लोग वर्षभर में हुई भूल-चूक के लिए एक-दूसरे से हाथ जोड़कर 'उत्तम क्षमा' के भाव के साथ क्षमा याचना करेंगे।

