मानवता अभी जिंदा है: अलवर में घायल बेजुबान के लिए मसीहा बने दिव्यांग पुनर्वास गृह के विक्रम और डॉ. पारुल
अलवर / हीरालाल भूरानी।
अलवर रेलवे स्टेशन जंक्शन के पास स्थित रेलवे कॉलोनी में मानवीय संवेदना और करुणा की एक मिसाल देखने को मिली। कॉलोनी में अत्यधिक दर्द से तड़प रहे एक गंभीर रूप से घायल बेजुबान कुत्ते को देखकर बौद्धिक दिव्यांग पुनर्वास गृह के कार्यकर्ता विक्रम सिंह गुर्जर एवं डॉ. पारुल लाटा तुरंत मदद के लिए आगे आए।
त्वरित कदम उठाकर बचाई जान
दोनों ने बेजुबान की दयनीय हालत को देखते हुए बिना किसी देरी के तुरंत पशु चिकित्सा अस्पताल की एम्बुलेंस सेवा को फोन कर मौके पर बुलाया। एम्बुलेंस के पहुंचते ही उन्होंने स्थानीय लोगों की मदद से घायल कुत्ते को सुरक्षित वाहन में लादकर उचित इलाज के लिए अस्पताल भिजवाने में पूर्ण सहयोग किया। समय पर प्राथमिक उपचार मिलने से बेजुबान की जान बच सकी।
सच्ची इंसानियत की पेश की मिसाल
विक्रम सिंह गुर्जर और डॉ. पारुल लाटा की इस त्वरित और मानवीय पहल की स्थानीय निवासियों एवं प्रत्यक्षदर्शियों ने दिल खोलकर सराहना की। लोगों का कहना था कि बेजुबान और असहाय प्राणियों के प्रति ऐसी दया और संवेदनशीलता ही समाज में सच्ची इंसानियत की पहचान है। इस सराहनीय कार्य ने शहरवासियों को भी बेजुबान पशु-पक्षियों के प्रति करुणामयी दृष्टिकोण अपनाने का एक सुंदर संदेश दिया है।

