महिला एवं बाल विकास विभाग की अभिनव पहल, जिलेभर की 1247 कार्यकर्ताओं को मिलेगा प्रशिक्षण
भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिले में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) को अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण एवं बाल-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से रॉकेट लर्निंग संस्था एवं समेकित बाल विकास सेवा के संयुक्त तत्वावधान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के क्षमता विकास हेतु चरणबद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप प्रारंभिक बाल शिक्षा को नई दिशा दी जा रही है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के उपनिदेशक सिकरामाराम चोयल ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम चरण में भरतपुर सेक्टर क्षेत्र की 114 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान आधुनिक शिक्षण तकनीकों, खेल एवं गतिविधि-आधारित अधिगम, बाल मनोविज्ञान, भाषा एवं संज्ञानात्मक विकास तथा विद्यालय पूर्व शिक्षा के व्यवहारिक पहलुओं पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नवीन एवं बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों से दक्ष बनाना है, ताकि बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक एवं बौद्धिक विकास को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इससे आंगनबाड़ी केन्द्रों पर सीखने का वातावरण अधिक रोचक, सहभागी एवं गुणवत्तापूर्ण बनेगा।
प्रशिक्षण से बढ़ा आत्मविश्वास, नवाचारों को अपनाने की जताई प्रतिबद्धता-
प्रशिक्षण में भाग लेने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने इसे अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया। खटीक मोहल्ला की गुड्डी ने कहा कि प्रशिक्षण से बच्चों के समग्र विकास के लिए रचनात्मक गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने की नई समझ मिली है। लक्ष्मी नगर की हेमा सिनसिनवार ने बताया कि प्रशिक्षण में सीखी गई गतिविधियां बच्चों को सहज रूप से सीखने के लिए प्रेरित करेंगी तथा उनकी सीखने की क्षमता को विकसित करेंगी। अनाह गेट, सूरजपोल की हिना कुमारी शर्मा ने प्रशिक्षण को अत्यंत रोचक, व्यवहारिक एवं प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि मिशन बुनियाद के अंतर्गत प्राप्त प्रशिक्षण आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा। इसी प्रकार रुचि शर्मा, गौरी शर्मा, मंजू चाहर, बबीता रानी, शीला देवी एवं विमलेश सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने भी प्रशिक्षण को बच्चों के कौशल विकास एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अत्यंत लाभकारी बताया।
गतिविधियों से समझाए मूल सिद्धांत-
जिला समन्वयक प्राची चौधरी ने बताया कि प्रशिक्षण की शुरुआत एक रोचक समूह गतिविधि से की गई, जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने कागज़ के ग्लासों से सबसे ऊँचा टावर बनाया। इस गतिविधि के माध्यम से यह समझाया गया कि जैसे किसी टावर की मजबूती उसकी मजबूत नींव पर निर्भर करती है, उसी प्रकार बच्चों के जीवन के प्रारंभिक वर्ष उनके भविष्य के सीखने, व्यक्तित्व निर्माण एवं सर्वांगीण विकास की मजबूत आधारशिला होते हैं। इस उदाहरण के जरिए ईसीसीई के महत्व को सरल एवं व्यवहारिक तरीके से समझाया गया। उन्होंने बताया कि अनुभव आधारित अधिगम की अवधारणा को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रतिभागियों को पहले विभिन्न खाद्य पदार्थों के चित्र दिखाए गए और बाद में उन्हीं वस्तुओं का वास्तविक अनुभव कराया गया। चर्चा के दौरान बताया गया कि बच्चे सबसे प्रभावी ढंग से स्वयं देखकर, छूकर, सूंघकर, चखकर तथा गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से सीखते हैं। अनुभव आधारित यह शिक्षण पद्धति बच्चों के सीखने को अधिक अर्थपूर्ण, रोचक एवं स्थायी बनाती है और ईसीसीई की महत्वपूर्ण आधारशिला है।
जिलेभर में चरणबद्ध होंगे प्रशिक्षण-
जिला समन्वयक ने बताया कि आगामी चरण में 1 अगस्त को बयाना, 11 अगस्त को उच्चैन, 18 अगस्त को भुसावर, 24 अगस्त को नदबई, 5 सितम्बर को वैर, 11 सितम्बर से सेवर तथा 21 से 26 सितम्बर तक रूपवास ब्लॉक के विभिन्न सेक्टरों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि जिले की कुल 1,247 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा। प्रत्येक प्रशिक्षण सत्र में कार्यकर्ताओं के ज्ञान एवं कौशल का उन्नयन किया जाएगा, जिससे वे खेल एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण पद्धति को प्रभावी ढंग से आंगनबाड़ी केन्द्रों पर लागू कर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध करा सकें। प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए प्रत्येक सेक्टर में पर्यवेक्षकों एवं प्रशिक्षकों की जिम्मेदारियां भी निर्धारित की गई हैं।

