खैरथल में सामाजिक न्याय सप्ताह का आयोजन: डॉ. प्रभाकर शर्मा बोले- 'सहानुभूति नहीं, समानुभूति और कौशल विकास से बनेगा दिव्यांगों का भविष्य'
खैरथल / हीरालाल भूरानी
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग खैरथल-तिजारा द्वारा आयोजित समाज कल्याण सप्ताह समारोह के अंतर्गत 'दिव्यांगजन कल्याण दिवस' का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वक्ता के रूप में डॉ. प्रभाकर शर्मा ने दिव्यांगजन सशक्तिकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण और विचारणीय संदेश दिया।
सहानुभूति नहीं, आत्मनिर्भरता है असली सशक्तिकरण
डॉ. प्रभाकर शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि दिव्यांगजनों के प्रति अत्यधिक सहानुभूति और अनावश्यक सहयोग कई बार उनके सशक्तिकरण की राह में बड़ी बाधा बन जाता है। जब किसी व्यक्ति को उसकी क्षमता के बजाय उसकी दिव्यांगता के आधार पर कमजोर मानकर हर कार्य में सहायता दी जाती है, तो धीरे-धीरे उसमें निर्भरता की भावना विकसित होने लगती है, जिससे उसका आत्मविश्वास प्रभावित होता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि निरंतर विशेष सुविधा या अनावश्यक सहयोग मिलने से व्यक्ति में अधिकार-बोध के स्थान पर दूसरों पर निर्भर रहने की प्रवृत्ति पनपने का खतरा रहता है। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि दिव्यांगजनों को कमजोर समझने के बजाय उनकी वास्तविक क्षमताओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर प्रदान किए जाएं।
कौशल विकास और शिक्षा पर जोर
डॉ. शर्मा ने जोर देते हुए कहा कि दिव्यांगजनों की वास्तविक आवश्यकताओं और परिस्थितियों को समझते हुए उसी के अनुरूप सहयोग देना चाहिए। इसके साथ ही उन्हें कौशल विकास, शिक्षा, प्रशिक्षण, रोजगार और आत्मनिर्भरता के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है।
गरिमामयी उपस्थिति
इस विशेष कार्यक्रम में कौशल्याम इंस्टीट्यूट फॉर ट्रेनिंग एंड रिसर्च के प्रशिक्षणार्थी, शिव ज्योति मनोविकास विद्यालय के लाभार्थी तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग खैरथल-तिजारा के समस्त कार्मिक गण उपस्थित रहे।

