अलवर:राजर्षि अभय समाज रामलीला: दशरथ दरबार से स्वर्गारोहण तक के भावुक प्रसंगों ने नम की आंखें, केवट-राम संवाद पर झूमे दर्शक
अलवर (अनिल कुमार गुप्ता): श्री राजर्षि अभय समाज, अलवर की ओर से रामलीला मैदान में आयोजित 111वें वर्ष की ऐतिहासिक रामलीला के छठे दिन मंचन ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इस दौरान दशरथ दरबार, राम राज्याभिषेक की तैयारी, मंथरा-कैकई संवाद, कोप भवन प्रसंग, राम वनवास, केवट प्रसंग, चित्रकूट विश्राम और अंत में महाराज दशरथ के स्वर्गारोहण तक के विभिन्न मार्मिक प्रसंगों का अत्यंत जीवंत एवं मनोहारी मंचन किया गया।
राज्याभिषेक की तैयारियों से लेकर कोप भवन तक का दृश्य लीला का शुभारंभ दशरथ दरबार से हुआ, जहां महाराज दशरथ ने गुरु वशिष्ठ और मंत्रियों से विचार-विमर्श के बाद ज्येष्ठ पुत्र श्रीराम के राज्याभिषेक की घोषणा की। इस शुभ समाचार से पूरी अयोध्या में उल्लास छा गया। परंतु, दासी मंथरा के बहकावे में आकर महारानी कैकई कोप भवन में चली गईं और राजा दशरथ से अपने दो वरदान—भरत के लिए राज्य और राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लिया। पिता के वचनों की आन रखने के लिए श्रीराम ने सहर्ष वन जाना स्वीकार किया, जिससे माता कौशल्या और पूरी अयोध्या व्याकुल हो उठी।
केवट प्रसंग और भावुक कर देने वाला संवाद वन गमन के दौरान जब श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण गंगा नदी पार करने पहुंचे, तो केवट ने भगवान के चरण धोने का आग्रह किया। केवट ने कहा कि आपके चरण-स्पर्श से पत्थर की शिला भी नारी बन जाती है। नदी पार कराने के उपरांत जब माता सीता ने मुद्रिका देनी चाही, तो केवट ने यह कहकर मना कर दिया कि, "आप लोगों को भवसागर से पार करते हैं और मैं गंगा पार कराता हूँ, अतः एक ही कार्य करने वाले पारिश्रमिक नहीं लेते।" केवट के इस प्रेमपूर्ण संवाद ने दर्शकों को पूरी तरह भावुक कर दिया। इसके बाद राम जी ने भारद्वाज मुनि के निर्देशानुसार चित्रकूट में विश्राम किया।
दशरथ का स्वर्गारोहण और संगीत की स्वर लहरियां उधर, सुमंत के खाली हाथ लौटने और राम-सीता के वन चले जाने का समाचार सुनकर महाराज दशरथ अत्यंत अधीर हो गए। उन्होंने अपने जीवन का संताप व्यक्त करते हुए 'राम-राम' कहते हुए अपने प्राण त्याग दिए और उनका स्वर्गारोहण हो गया।
संगीत और व्यास पीठ का सानिध्य लीला के दौरान विगत 40 वर्षों से व्यास पीठ पर विराजमान श्री महेश चंद शर्मा ने रामचरितमानस की चौपाइयों का अपने मधुर कंठ से सस्वर गायन किया। वहीं, संस्था के संगीत निर्देशक जितेंद्र गुप्ता के संयोजन में जसवंत सैनी, प्रेम राठौड़, नितिन और बाल कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भजनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। संस्था इस मंचन के माध्यम से भगवान श्रीराम के प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को भी जन-जन तक पहुँचा रही है।

