ध्वजारोहण के साथ भरतपुर में 107वें श्री जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेले का भव्य आगाज:मेले हमारी संस्कृति और रोजगार के बड़े माध्यम-गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम
भरतपुर / कोशलेन्द्र दत्तात्रेय
पूर्वी राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक पहचान बन चुका श्री जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेले का 107वां संस्करण गुरुवार को पूरे हर्षोल्लास और विधि-विधान के साथ ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ। गृह एवं पशुपालन राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम और जिला कलक्टर कमर चौधरी ने संयुक्त रूप से पूजा-अर्चना कर ध्वजारोहण किया तथा फीता काटकर मेले का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर मेयर अनुराधा सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
संस्कृति, परंपरा और रोजगार के प्रतीक हैं मेले: गृह राज्यमंत्री
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि मेले हमारी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को सहेजने के साथ-साथ आमजन को रोजगार के बेहतरीन अवसर उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश सरकार मेलों के वैभव और उनके ऐतिहासिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए लगातार गंभीर प्रयास कर रही है।
उन्होंने इसके इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि महाराजा किसन सिंह ने वर्ष 1920 में अपने दादा महाराजा जसवंत सिंह की स्मृति में इस मेले की शुरुआत की थी। रियासतकाल में उन्नत पशुपालन को बढ़ावा देने वाला यह मेला आज राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और मध्य प्रदेश सहित देशभर के पशुपालकों, व्यापारियों और पर्यटकों का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
सौंदर्यीकरण और जलभराव के स्थायी समाधान पर जोर
जिला कलक्टर कमर चौधरी ने कहा कि मेला स्थल पर व्यापारियों के संरक्षण, आमजन की सुरक्षा और सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। मेला मैदान के स्वरूप को निखारने के साथ-साथ जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नाला निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। आने वाले समय में यहाँ सौंदर्यीकरण और मूलभूत सुविधाओं के विकास के कई नए कार्य प्रस्तावित हैं।
रिकॉर्ड आय और प्रमुख आकर्षण
मेला अधिकारी एवं पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. अरविंद चौधरी ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ष 1963 से इसे प्रतिवर्ष राज्य स्तरीय मेले के रूप में आयोजित किया जा रहा है। मेले की लोकप्रियता और व्यापार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गत वर्ष जहाँ मेले से 92 लाख रुपये की आय हुई थी, वहीं इस वर्ष अब तक 1 करोड़ 17 लाख 98 हजार रुपये से अधिक की रिकॉर्ड आय प्राप्त हो चुकी है।
मेले के मुख्य आकर्षण:
-
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: भजन, जकड़ी, नौटंकी और पारंपरिक ढोला गायन।
-
रोमांच व मनोरंजन: झूले, सर्कस, मौत का कुआँ, ब्रेक डांस, ड्रैगन, नाव और जादू के खेल।
-
खेलकूद: राष्ट्रीय स्तर का कुश्ती दंगल और भव्य सांस्कृतिक संध्या।
-
विशेष आयोजन: रावण दहन और भव्य आयोजन।
अतिरिक्त निदेशक पशुपालन खुशीराम मीना ने सभी अतिथियों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद मृदुल सिंह, एडीएम सिटी राहुल सैनी, जिला अध्यक्ष शिवानी दायमा, गिरधारी तिवारी, सत्येंद्र गोयल, रूपेंद्र सिंह, जगत सिंह गुर्जर सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी व बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

