जयपुर नेशनल हाइवे पर बड़ी कार्रवाई: हरी लकड़ी से भरा ट्रक ज़ब्त,चौगुने किराए के लालच में हो रहा था अवैध लकड़ी का खेल,चालक गिरफ्तार
हलैना / भरतपुर ( विष्णु मित्तल)
जयपुर नेशनल हाइवे-21 पर वन विभाग और प्रशासन ने अवैध लकड़ी परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। उप वन संरक्षक वी.वी. चेतन कुमार के निर्देशन में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत वन रेंज नदबई की टीम ने हलैना कस्बे के पास से हरी लकड़ी से भरा एक संदिग्ध ट्रक ज़ब्त किया है। इस कार्रवाई के दौरान ट्रक चालक को ढेंचा के खेत में छिपते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।
मुखबिर की सूचना पर बिछाया गया जाल
वन रेंज नदबई के रेंजर नरेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि उच्च अधिकारियों को सूचना मिली थी कि दौसा जिले के लालसोठ से एक भारी मात्रा में हरी लकड़ी से भरा ट्रक उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की ओर जा रहा है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने हलैना थाना क्षेत्र के आमोली-मोलोनी के बीच नाकाबंदी कर दी।
वन टीम को देखकर चालक ने भागने की कोशिश की, लेकिन चारों तरफ से घेराबंदी देख वह हलैना कस्बे के पास ट्रक को सड़क पर ही छोड़कर पास के ढेंचा के खेत में जा छिपा। टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए चालक को खेत से ढूंढ निकाला और गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपी की पहचान दौसा जिले के लालसोठ निवासी श्यामसुंदर के रूप में हुई है।
ट्रक में भरी थी करीब 300 मन हरी लकड़ी
त्रिपाल से ढंके इस ट्रक की तलाशी लेने पर अंदर करीब 300 मन हरी लकड़ी भरी पाई गई। शुरुआती पूछताछ में सामने आया कि यह लकड़ी लालसोठ से अलीगढ़ के लिए ले जाई जा रही थी। वन विभाग ने वाहन और लकड़ी को ज़ब्त कर वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। कार्रवाई करने वाली टीम में रेंजर नरेंद्र कुमार चौधरी, वनपाल अजय कुमार, केशव सिंह, आकाश शर्मा, राजकुमार, धर्मयुग, विक्रम सिंह, नरेंद्र कटारा, हुकुम सिंह और रिंकी सावलिया शामिल रहे।
अंदर की कहानी: रूट बदलने पर मजबूर हुए तस्कर और लकड़ी का काला कारोबार
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बदला गया रूट पड़ा महंगा: राजस्थान के दौसा, जयपुर और टोंक से अवैध हरी लकड़ी आमतौर पर एक्सप्रेसवे (दिल्ली-बड़ौदा और दिल्ली-कैथून) के रास्ते यूपी के अलीगढ़, कासगंज और मथुरा भेजी जाती थी। इन मार्गों पर पुलिस की सख्ती और सुविधा शुल्क बढ़ने के बाद तस्करों ने बचने के लिए जयपुर-आगरा नेशनल हाइवे-21 (वाया भरतपुर) का नया रूट चुना था। पिछले 35 दिनों में इस मार्ग पर एक दर्जन वाहन ज़ब्त किए जा चुके हैं।
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चार गुना किराए का लालच: वाहन मालिकों को साधारण किराए से चार गुना अधिक किराया (लालसोठ से अलीगढ़ का 50,000 रुपये से अधिक) मिलने के लालच में वे इस अवैध धंधे में उतर रहे हैं। वहीं चालकों को प्रति चक्कर 3,000 रुपये और खलासी को 1,000 रुपये का प्रलोभन दिया जाता है।
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मवेशी चर्बी निकालने वाली भट्टियों तक पहुंचती है लकड़ी: एक नाम न छापने की शर्त पर पकड़े गए चालक ने बताया कि अलीगढ़ में इस लकड़ी का भाव 10 से 15 रुपये प्रति किलोग्राम है। इस लकड़ी का उपयोग मुख्य रूप से मृत मवेशियों की खाल से चर्बी निकालने वाली बूचड़खाने की भट्टियों को जलाने के लिए किया जाता है।

