नवरात्र के पर्व पर माता की उपासना के साथ ही व्रत में संयम और नियमों की भी करें पालना
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन) सनातन धर्म में शक्ति स्वरूपा मां आदिशक्ति भगवती दुर्गा की आराधना के नौ दिन अत्यंत पवित्र, ऊर्जावान और कल्याणकारी माने गए हैं। कल रविवार से नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में भक्तजन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना ,कलश स्थापना कर व्रत का संकल्प लेते हैं ।और अखंड ज्योति प्रज्वलित कर माता के नौ विभिन्न स्वरूपों की उपासना करते हैं। शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि देवी दुर्गा का वास उसी स्थान पर होता है जहां पूर्ण शुद्धि, सात्विकता और अनुशासन का वातावरण हो। योग शिक्षक पंडित लोकेश कुमार के अनुसार नवरात्र का यह पर्व शक्ति की उपासना, श्रद्धा और आत्मसंयम का प्रतीक माना गया है।
व्रत में संयम और नियमों की पालन जरूरी
पंडित ने कहा कि शारदीय नवरात्र शक्ति की उपासना का पर्व है। मां की आराधना में श्रद्धा, निष्ठा, त्याग और तपस्या का विशेष महत्व है। व्रत के दौरान हल्का भोजन या फलाहार करने से शरीर हल्का महसूस हो सकता है। और पूजा-पाठ में मन लगाने में सुविधा रहती है।
उन्होंने कहा कि नवरात्र में व्रत रखने वालों को पूजा की विधि और संकल्प के नियमों का ध्यान रखना चाहिए। जो श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत करना चाहते हैं उन्हें शुरुआत में ही अपनी व्रत-पद्धति तय कर लेनी चाहिए और उसी के अनुरूप पूजा करनी चाहिए। इसके लिए किसी योग पंडित से मार्गदर्शन लेना भी उपयोगी है।
पहली बार व्रत रखने वाले क्या करें
पहली बार नवरात्र का व्रत रखने की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए पंडित ने नियमपूर्वक व्रत करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि नवरात्र में व्रत रखने की अलग-अलग परंपराएं हैं। कुछ श्रद्धालु फलाहार करते हैं, जबकि कुछ निर्धारित समय पर सात्विक भोजन करते हैं। परिवार में कलश स्थापना और संकल्प के समय व्रत की विधि तय करना महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने कहा कि जब शारदीय नवरात्र के पहले दिन (कलश स्थापना ) फलाहार पर रह कर व्रत करने का संकल्प लेते हैं तो नौ दिन फलाहार पर ही रहना चाहिए। वहीं अगर प्रथम दिन सेंधा नमक का इस्तेमाल करते हैं । तो पूरी नवरात्र सेंधा नमक का ही उपयोग करना है।
नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा केवल व्यक्तिगत सुख-समृद्धि के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और संसार के कल्याण की भावना से की जानी चाहिए। उन्होंने भक्तों से सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ मां की आराधना करने व सभी के सुख, शांति और मंगल की कामना करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पूजा के दौरान बाहरी आडंबर के बजाय आस्था, संयम और लोक कल्याण की भावना को प्राथमिकता देनी चाहिए।

