अलवर की 111वीं ऐतिहासिक रामलीला: भरत-कैकेयी संवाद, चित्रकूट मिलाप और पंचवटी विश्राम की लीलाओं ने मोहा मन
अलवर/ अनिल कुमार गुप्ता
श्री राजर्षि अभय समाज, अलवर की ओर से स्थानीय रामलीला मैदान में आयोजित 111वें वर्ष की ऐतिहासिक रामलीला का मंचन इन दिनों शहरवासियों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सातवें दिन के पावन प्रसंगों के तहत भरत-कैकेयी संवाद, चित्रकूट में भरत मिलाप, खड़ाऊ अभिषेक, जयंत मोह और पंचवटी विश्राम तक की विभिन्न लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण एवं मनोहारी मंचन किया गया।
भरत के त्याग और राम-प्रेम देख रोंचित हुए दर्शक
लीला का विधिवत शुभारंभ 'भरत-कैकेयी संवाद' से हुआ। मंच पर कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुति से दिखाया कि किस प्रकार भरत ने अपनी माता कैकेयी को उनके कृत्य के लिए कोसा और बड़े भाई श्रीराम के प्रति अपने अथाह प्रेम को प्रकट किया। संवाद के दौरान भरत की करुणा, विवशता और स्व-अपराधबोध के सजीव चित्रण ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं।
इसके पश्चात भरत माता कौशल्या के पास पहुंचे और क्षमा याचना की। सभी अयोध्यावासियों के साथ भरत भगवान राम से मिलने चित्रकूट के लिए प्रस्थान करते हैं। चित्रकूट में 'भरत मिलाप' की लीला ने एक भाई का दूसरे भाई के प्रति अगाध प्रेम, त्याग और सम्मान का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। अयोध्या का राज्य दोनों भाइयों के बीच आपसी प्रेम के आगे गौण नजर आया। गुरु वशिष्ठ और माताओं के समझाने पर भरत प्रभु श्रीराम की चरण पादुकाएं लेकर अयोध्या के लिए लौटे।
खड़ाऊ अभिषेक और जयंत मोह की लीला
'खड़ाऊ अभिषेक' प्रसंग में दिखाया गया कि कैसे भरत ने अयोध्या के राज्य सिंहासन पर श्रीराम की चरण पादुकाएं स्थापित कर उनका अभिषेक किया। भरत ने नंदीग्राम में एक साधारण वनवासी की भांति जीवन बिताते हुए वहीं से राज्य का संचालन किया।
इसके बाद 'जयंत मोह' की लीला का मंचन किया गया, जिसमें जयंत द्वारा माता सीता को घायल करने पर श्रीराम द्वारा बाण छोड़े जाने और अंततः शरण में आने पर क्षमादान देने की कथा को जीवंत किया गया। प्रसंग ने यह संदेश दिया कि राम-विरोधी का ब्रह्मांड में कोई रक्षक नहीं होता। अंत में, राम के पंचवटी में पर्णकुटी बनाकर रहने के दृश्यों के साथ सातवें दिन की लीला का विश्राम हुआ।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश
संस्थान की ओर से इस 111वें वर्ष की रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण के महत्वपूर्ण संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाने का अनूठा प्रयास किया जा रहा है, जिसकी शहरभर में सराहना हो रही है।

