लाइसेंस हरा, बाजार में प्रतिबंधित पटाखों का पहरा; एनसीआर में ग्रीन पटाखों की आड़ में अवैध बिक्री पर बड़े सवाल!आखिर कैसे खुली सीमा लांघकर पहुंच रहा अवैध माल?
गोविंदगढ़ ,अलवर (अमित खेड़ापती)
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में शामिल होने के कारण पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। इसके बावजूद, हर साल दीपावली के पावन पर्व पर नियमों की आड़ में प्रतिबंधित पटाखों की अवैध बिक्री का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ जाता है। सवाल यह है कि जब प्रशासनिक स्तर पर लाइसेंसधारी दुकानदारों के लिए नियम और श्रेणियां स्पष्ट हैं, तो प्रतिबंधित और खतरनाक पटाखे आखिर बाजार की दहलीज तक कैसे पहुंच जाते हैं?
कैसा है लाइसेंस का गणित और असलियत?
नियमानुसार, लाइसेंस धारकों को केवल निर्धारित श्रेणी के अनुमत ग्रीन पटाखों की ही बिक्री करनी होती है। लेकिन जमीनी हकीकत इन कागजी दावों से अलग नजर आती है। बाजार में हर साल दबी जुबान से अवैध बिक्री और कथित मिलीभगत की चर्चाएं आम हो जाती हैं। हालांकि, ये दावे कितने सच हैं और इनमें कितनी सच्चाई है, यह तो केवल समय पर की जाने वाली पारदर्शी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है। फिलहाल, प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि लाइसेंस की आड़ में नियमों की धज्जियां न उड़ाई जाएं।
मिठाइयों और खाद्य पदार्थों पर भी मंडरा रहा खतरा
त्योहारी सीजन में चिंता केवल पटाखों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आम जनमानस की सेहत से जुड़ा एक और गंभीर पहलू खाद्य पदार्थों में मिलावट का है। दीपावली नजदीक आते ही सिंथेटिक दूध, पनीर और मिलावटी मिठाइयों का काला कारोबार भी सक्रिय हो जाता है। आमजन की अब केवल एक ही अपेक्षा है कि संबंधित विभाग महज कागजी नोटिसों या बैठकों तक सीमित न रहें, बल्कि बाजार में उतरकर औचक निरीक्षण करें, नमूने लें और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का उदाहरण पेश करें।
बड़ा सवाल: क्या इस बार होगी प्रभावी कार्रवाई?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन इस दीपावली पर प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री और मिलावटखोरी पर कितनी पैनी और प्रभावी निगरानी रख पाता है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ क्या इस बार कोई ठोस एक्शन लिया जाएगा या फिर मामला हर साल की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा?

