खैरथल-तिजारा में एनसीआर के नियम और त्योहारी चुनौतियाँ:लाइसेंस में ग्रीन पटाखे, बाजार में प्रतिबंधित पटाखे!
खैरथल (हीरालाल भूरानी)
खैरथल-तिजारा क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का हिस्सा होने के कारण पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों के दायरे में आता है। ऐसे में यहाँ हर गतिविधि पर विशेष नजर रखनी होती है। खासकर दीपावली के त्योहारी सीजन के दौरान पटाखों की बिक्री और उनके उपयोग को लेकर प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों व अनुमतियों की पालना अनिवार्य कर दी जाती है।
बाजार तक कैसे पहुँचते हैं प्रतिबंधित पटाखे?
नियमों के अनुसार, केवल लाइसेंसधारी दुकानदार ही निर्धारित श्रेणी के अनुमत पटाखों की बिक्री कर सकते हैं। इसके बावजूद हर साल दीपावली के आसपास बाजार में प्रतिबंधित या नियमों के विपरीत पटाखों की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते रहे हैं।
जब बिक्री के लिए स्पष्ट लाइसेंस व्यवस्था मौजूद है, तो यह सवाल लाजिमी है कि आखिर प्रतिबंधित पटाखे बाजार तक पहुँचते कैसे हैं? स्थानीय स्तर पर अवैध बिक्री और कथित मिलीभगत को लेकर अक्सर चर्चाएँ सामने आती हैं, जिनकी वास्तविकता की थाह केवल निष्पक्ष और कड़ी प्रशासनिक जाँच के बाद ही मिल सकती है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि लाइसेंस की आड़ में कहीं प्रतिबंधित पटाखों का अवैध कारोबार तो नहीं पनप रहा।
सिर्फ पटाखे ही नहीं, खाद्य पदार्थों की शुद्धता पर भी हो निगरानी
त्योहारी सीजन में केवल आतिशबाजी ही नहीं, बल्कि बाजार में मिलने वाली मिलावटी मिठाइयाँ, सिंथेटिक दूध-पनीर और अन्य खाद्य पदार्थों की बिक्री भी आमजन की सेहत के लिए बड़ा खतरा बनती है। आए दिन इसको लेकर शिकायतें सामने आती रहती हैं।
आम जनता की सीधी अपेक्षा है कि संबंधित विभाग केवल कागजी बैठकों और खानापूर्ति तक सीमित न रहें, बल्कि बाजार में वास्तविक धरातल पर औचक निरीक्षण हो, खाद्य पदार्थों के नमूने (सैंपल) लिए जाएँ और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई धरातल पर नजर आए।
अब देखना यह होगा कि इस दीपावली प्रशासन प्रतिबंधित पटाखों और मिलावटखोरों पर कितनी प्रभावी लगाम कस पाता है, और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ क्या सख्त कदम उठाए जाते हैं।

