वैध पीयूसीसी के बिना नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल एवं सीएनजी; भरतपुर जिले में नो पीयूसीसी, नो फ्यूल नियम सख्ती से लागू करने के निर्देश
भरतपुर, (कौशलेन्द्र दत्तात्रेय) एनसीआर क्षेत्र में वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से भरतपुर जिले में नो पीयूसीसी, नो फ्यूल नियम की सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाएगी। जिला रसद अधिकारी कुशाल बिलाला ने जिले के समस्त पेट्रोल, डीजल एवं सीएनजी स्टेशनों के संचालकों को वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसीसी) के बिना किसी भी वाहन को ईंधन उपलब्ध नहीं कराने के निर्देश दिए हैं।
जिला रसद अधिकारी ने बताया कि शासन सचिव, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, राजस्थान, जयपुर के पत्र दिनांक 1 अक्टूबर, 2026 तथा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के निर्देशों की अनुपालना में जारी आदेश के अनुसार, जिले के सभी पेट्रोल पम्पों पर 1 अक्टूबर, 2026 से नो पीयूसीसी, नो फ्यूल नियम सख्ती से लागू किया जाना है।
पेट्रोल पम्पों पर एएनपीआर सिस्टम लगाना अनिवार्य
जिला रसद अधिकारी ने सभी फ्यूल एवं सीएनजी स्टेशनों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) सिस्टम अथवा अन्य सक्षम तकनीकी व्यवस्था की स्थापना एवं संचालन तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही प्रत्येक पेट्रोल पम्प पर वाहन चालकों की जानकारी के लिए नो पीयूसीसी, नो फ्यूल संबंधी स्पष्ट सूचना बोर्ड प्रमुख स्थान पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करना होगा।
तेल विपणन कंपनियां करेंगी नियमित निगरानी-
उन्होंने बताया कि आदेश के तहत इंडियन ऑयल कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) एवं नायरा के संबंधित विक्रय अधिकारियों को अपने क्षेत्राधिकार के पेट्रोल पम्पों पर इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
7 दिवस में प्रस्तुत करनी होगी अनुपालना रिपोर्ट
जिला रसद अधिकारी ने सभी संबंधित पेट्रोल पम्प संचालकों एवं तेल विपणन कंपनियों के विक्रय अधिकारियों को उक्त निर्देशों की सर्वाेच्च प्राथमिकता से पालना सुनिश्चित करने तथा आदेश जारी होने के सात दिवस के भीतर अनुपालना रिपोर्ट कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर अंकुश लगाना तथा जिले में स्वच्छ एवं बेहतर वायु गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाना है।

