मनाई गई सर्वपितृ अमावस्या, विधि-विधान से तर्पण कर पुरखों को दी विदाई
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/ कमलेश जैन) कस्बे सहित उपखंड क्षेत्र में पितृ पक्ष के अंतिम दिन शनिवार को आज सर्वपितृ अमावस्या मनाई गई। इस अवसर पर लोगों ने विधि-विधान से पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण कर उन्हें विदाई दी।
घरों में पितरों के निमित्त पूजा-अर्चना के साथ ब्राह्मण भोज और दान-पुण्य भी किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार आज के दिन पूर्वजों का स्मरण कर उनके निमित्त कर्म करने से परिवार पर पितरों का आशीर्वाद बना रहता है।
भाद्रपद पूर्णिमा 26 सितंबर से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या 10 अक्टूबर तक चलने वाले पितृ पक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण किया गया। पितृ पक्ष की आज शनिवार की अंतिम तिथि को सर्वपितृ अमावस्या या पितृ विसर्जन अमावस्या भी कहा जाता है। मान्यता है कि जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि याद नहीं है या किसी कारणवश पितृ पक्ष में श्राद्ध नहीं कर पाए हैं, उन्होंने आज के अंतिम दिन उनका श्राद्ध और तर्पण किया हैं।
पंडित लोकेश कुमार ने बताया कि शास्त्रों में सर्वपितृ अमावस्या पर सभी पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करने का विशेष महत्व बताया गया है। आज के दिन श्रद्धापूर्वक पूर्वजों का स्मरण करने, ब्राह्मण भोज कराने और जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा है। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितरों की प्रसन्नता से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इसलिए लोगों ने आज श्रद्धा और विश्वास के साथ पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान कर पितृ पक्ष का समापन किया है।
सर्वपितृ अमावस्या का महत्व
यह पितृ पक्ष की अंतिम तिथि है। आज के दिन उन सभी पितरों के निमित्त श्राद्ध किया गया है। जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका किसी कारण से नियमित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, आज ज्ञात और अज्ञात सभी पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण किया गया।

