सड़क पर घायल पड़े मां-बच्चे को देखकर दिखाई संवेदनशीलता, वन विभाग की टीम ने किया रेस्क्यू
गोलाकाबास / अलवर (रितिक शर्मा) । राजगढ़ उपखंड की ग्राम पंचायत गोलाकाबास के वार्ड नंबर 11 में सड़क मार्ग पर एक मादा बंदर और उसका बच्चा घायल अवस्था में पड़े मिलने से लोगों की चिंता बढ़ गई। सड़क पर घायल पड़े बेजुबान मां-बच्चे को देखकर मौके पर मौजूद लोगों ने संवेदनशीलता दिखाई और मामले की सूचना संबंधित विभाग तक पहुंचाई।
मामले की जानकारी मिलने पर पत्रकार रितिक शर्मा ने घायल बेजुबान जीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ग्राम विकास अधिकारी एवं सहायक वनपाल मुकेश कुमार मीणा को सूचना दी। इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घायल मादा बंदर व उसके बच्चे का सुरक्षित रेस्क्यू किया।
रेस्क्यू टीम में विकास कुमार मीणा वनरक्षक, मुकेश कुमार मीणा एवं रामोतार मीणा वन मित्र शामिल रहे। वन विभाग की टीम ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए दोनों घायल जीवों को उपचार के लिए वन नाका चौकी पहुंचाया।
“बेजुबानों की मदद करना ही सच्ची इंसानियत”
पत्रकार रितिक शर्मा ने कहा कि बेजुबान जानवर अपनी पीड़ा शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते। ऐसे में उनकी मदद करना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना मनुष्य का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि घायल और असहाय जीवों की सेवा का अवसर मिलना भी एक सौभाग्य है।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सेवा का संकल्प मन में लेकर चलता है, वह अपनी व्यस्तता के बावजूद जरूरतमंद और असहाय जीवों की मदद के लिए समय निकाल ही लेता है। समाज में इंसानियत तभी सार्थक होगी, जब हम केवल इंसानों के प्रति ही नहीं, बल्कि बेजुबान जीवों के प्रति भी संवेदनशीलता दिखाएं।
वन विभाग की कार्रवाई की सराहना
मादा बंदर और उसके बच्चे के सफल रेस्क्यू के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग की टीम की कार्रवाई की सराहना की। घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि बेजुबान जीवों की रक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति का नैतिक दायित्व है।
घायल मां और उसके बच्चे को समय पर मदद मिलने से एक सकारात्मक संदेश सामने आया—जहां संवेदनशीलता और इंसानियत जिंदा है, वहां बेजुबानों की जिंदगी भी सुरक्षित रह सकती है।

