श्री राजर्षि अभय समाज की श्रीरामलीला में गूंजी 'नारद मोह' और 'राम जन्म' की कथा
अलवर (अनिल गुप्ता) पारसी शैली पर आधारित विश्वविख्यात संस्था 'श्री राजर्षि अभय समाज' के विशाल रंगमंच पर 111वें वर्ष की श्रीरामलीला के दूसरे दिन भव्य और मनमोहक मंचन किया गया। आज के मुख्य आकर्षण 'राम जन्म का कारण' और 'नारद मोह' की लीला रहे, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
- नारद मोह और भगवान का श्राप प्रसंग बना आकर्षण का केंद्र
मंचन के दौरान दिखाया गया कि कैसे भगवान नारायण ने अपने परम भक्त देवर्षि नारद जी को विश्वमोहिनी पर मोहित करवाकर अपनी माया से वानर का मुख प्रदान किया। इससे कुपित होकर नारद जी ने भगवान नारायण को श्राप दिया— "बंदर का मुखड़ा दिया मुझे, तो कष्ट हरेंगे बंदर ही, जब तुम पर विपदा आएगी, तो दूर करेंगे बंदर ही।" भगवान नारायण ने अपनी लीला के तहत इस श्राप को सहर्ष स्वीकार किया।
कथा के आगे के प्रसंग में यह दर्शाया गया कि इसी श्राप के प्रभावस्वरूप आगे चलकर रावण द्वारा माता सीता के हरण के बाद सुग्रीव, हनुमान जी, अंगद और संपूर्ण वानर सेना द्वारा माता सीता की खोज की गई और लंका पर विजय प्राप्त हुई। इसके साथ ही प्रभु श्रीराम के अवतरण के कारणों का भी सुंदर चित्रण किया गया।
- कलाकारों ने अपने अभिनय से बांधा समां
आज के मंचन में कलाकारों ने अपने सजीव अभिनय से दर्शकों की वाहवाही लूटी जिसमे वेद शर्मा ने देवर्षि नारद की भूमिका का जीवंत प्रदर्शन किया। गोपाल (कामदेव) और कुमारी वेणी (रति) ने अपने अभिनय से प्रभावित किया। इसके अलावा जसवंत सैनी (लालदेव, कालादेव) और प्रेम सिंह राठौड़ ने भी अपनी कला का उत्कृष्ट परिचय दिया।
श्रीरामलीला के संपूर्ण प्रदर्शन के दौरान संस्था के संरक्षक एवं पूर्व महानिदेशक श्री महेश चंद शर्मा ने अपनी मधुर वाणी से श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों का सस्वर गायन कर वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम के अंत में संस्था के अध्यक्ष, पदाधिकारियों, सदस्यों और स्वयंसेवकों द्वारा मुख्य अतिथियों का भव्य एवं भावभीना स्वागत किया गया। सभी दर्शकों ने प्रभु श्रीराम की लीलाओं का आनंद लेने के पश्चात प्रसाद ग्रहण किया।

