सत्संग से ही आत्मज्ञान, विवेक और मानसिक शांति की प्राप्ति: भागवत कथा के समापन पर बोलीं ज्योति शिखा दीदी
लक्ष्मणगढ़ (अलवर/कमलेश जैन): कस्बे की खंडेलवाल धर्मशाला में पितृपक्ष के पावन अवसर पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का शुक्रवार को श्रद्धा एवं उल्लास के साथ विधिवत समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन प्रवचन करते हुए परम पूज्य आराध्या ज्योति शिखा दीदी ने कहा कि सत्य का संग और संत-महापुरुषों की वाणी सुनने से ही मनुष्य को आत्मज्ञान, विवेक और सच्ची मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
दीदी ने श्रीरामचरितमानस की चौपाई का संदर्भ देते हुए कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी लिखा है—‘बिनु सतसंग बिबेक न होई’। यानी सत्संग के बिना ज्ञान और विवेक संभव नहीं है। सत्संग अज्ञान के अंधकार को मिटाकर सही और गलत की पहचान कराता है। नियमित रूप से संतों के विचार सुनने से नकारात्मकता और तनाव दूर होता है तथा मन शांत रहता है। उन्होंने कहा कि केवल कथा श्रवण पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुनी हुई अच्छी बातों को अपने आचरण में उतारना आवश्यक है। दया, प्रेम, सेवाभाव और संस्कारों का निर्माण ही कथा श्रवण का सच्चा फल है।
- महाआरती व प्रसादी के साथ हुआ समापन
श्रद्धालु गोविंद खारवाल ने बताया कि सातवें दिन कथा के विश्राम अवसर पर भव्य महाआरती उतारी गई और श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया गया। पूरे सप्ताह भक्तों ने अपार आस्था के साथ कथा श्रवण कर धर्म लाभ उठाया। इस भव्य आयोजन में खंडेलवाल महासभा एवं श्री श्याम हनुमान सेवा परिवार का विशेष सहयोग रहा।
- बड़ी संख्या में उपस्थित रहे गणमान्य नागरिक
समापन समारोह में मातृशक्ति सहित खंडेलवाल समाज अध्यक्ष मदनलाल गुप्ता, नवीन खारवाल, जगदीश गुप्ता (खोकर), पार्षद सतीश बसवाल, खेमचंद बैरवा, प्रकाश प्रजापत, सुभाष रोणपुर, डालचंद बैरवा, बाबूलाल बैरवा, मुकेश गुप्ता, लोकेश कुमार, रोशन नकड़ा, सुभाष काठ, लल्लूराम सैनी, पिंटू सैन सहित क्षेत्र के अनेक व्यापारी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

