शारदीय नवरात्र का 11 अक्तूबर से भव्य शुभारंभ, हाथी पर सवार होकर आ रही हैं माता; जानें घट स्थापना के श्रेष्ठ मुहूर्त

Oct 10, 2026 - 19:32
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शारदीय नवरात्र का 11 अक्तूबर से भव्य शुभारंभ, हाथी पर सवार होकर आ रही हैं माता; जानें घट स्थापना के श्रेष्ठ मुहूर्त

भरतपुर (कोशलेन्द्र दत्तात्रेय)

आस्था और उपासना के महापर्व शारदीय नवरात्र का शुभारंभ रविवार, 11 अक्टूबर से आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के साथ हो रहा है। इस वर्ष नवरात्र 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक मनाए जाएंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रविवार से नवरात्र शुरू होने पर माता की सवारी हाथी मानी गई है, जिसे शास्त्र में वैभव, सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान, टोंक के निदेशक बाबूलाल शास्त्री ने घट स्थापना, पूजन और विजयदशमी के पावन पर्व को लेकर विशेष मुहूर्त और तिथियों की जानकारी साझा की है।

घट स्थापना और शुभ मुहूर्त

शास्त्रों और निर्णय सिंधु के अनुसार, प्रतिपदा तिथि में प्रात:काल द्विस्वभाव लग्न में देवी का आह्वान और घट स्थापना करना श्रेष्ठ माना गया है। हालांकि इस वर्ष चित्रा नक्षत्र (रात 10:32 बजे तक) और वैधृति योग (रात 9:05 बजे तक) होने के कारण इनके प्रारंभिक चरणों को छोड़कर अभिजीत मुहूर्त व अन्य श्रेष्ठ योगों में घट स्थापना का विधान है।

घट स्थापना के लिए निम्नलिखित समय सबसे उत्तम बताए गए हैं:

  • लाभ-अमृत चौघड़िया: सुबह 9:20 से दोपहर 12:13 बजे तक

  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:50 से दोपहर 12:37 बजे तक

  • धनु लग्न: सुबह 11:32 से दोपहर 1:36 बजे तक

  • शुभ चौघड़िया: दोपहर 1:40 से 3:06 बजे तक एवं शाम को प्रदोष काल में भी शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे।

अष्टमी और नवमी पूजन की तिथियां

  • 18 अक्टूबर (रविवार): इस दिन सुबह 8:28 बजे के बाद अष्टमी तिथि का आरंभ होगा। जो श्रद्धालु रात में अष्टमी पूजन करते हैं, वे इसी दिन अपनी पूजा संपन्न कर सकेंगे।

  • 19 अक्टूबर (सोमवार): सुबह 10:52 बजे तक अष्टमी रहेगी, जिसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी। अतः नवमी पूजन करने वाले श्रद्धालु इसी दिन माता की आराधना करेंगे।

  • विशेष योग: 14 अक्टूबर और 18-19 अक्टूबर को अमृत सिद्धि एवं स्वार्थ सिद्धि योग का संयोग रहेगा, जो साधना और नए कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।

20 अक्टूबर को विजयदशमी और दशहरा पर्व

मंगलवार, 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे तक नवमी और उसके बाद दशमी तिथि रहेगी। इस दिन श्रवण नक्षत्र की साक्षी में शमी पूजन, अपराजिता पूजन और विजयदशमी (दशहरा) का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

शास्त्री जी ने बताया कि विजयदशमी के दिन वाहन, आभूषण, सफेद वस्त्र खरीदने तथा नए व्यापार, मशीनरी व मांगलिक कार्यों का शुभारंभ करना बेहद शुभ और फलदायी रहेगा। नवरात्र के इन पावन दिनों में मंदिरों और घरों में पूरे विधि-विधान से मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की जाएगी।

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