शारदीय नवरात्र प्रारंभ: कलश स्थापना के श्रेष्ठ मुहूर्त, तिथियां और विजयदशमी की पूरी जानकारी
वैर (भरतपुर) कोशलेन्द्र दत्तात्रेय : आस्था और उपासना के महापर्व शारदीय नवरात्र का शुभारंभ रविवार, 11 अक्टूबर से आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के साथ होने जा रहा है। इस वर्ष नवरात्र 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक मनाए जाएंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रविवार से नवरात्र शुरू होने पर माता का आगमन हाथी पर माना गया है, जिसे वैभव, सुख और समृद्धि का प्रतीक कहा जाता है।
घट स्थापना के शुभ मुहूर्त (11 अक्टूबर)
देवी पुराण और तिथि तत्व के अनुसार, घट स्थापना प्रतिपदा तिथि में प्रात:काल द्विस्वभाव लग्न में करना श्रेष्ठ माना गया है। इस वर्ष चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के प्रारंभिक चरणों को छोड़कर अभिजीत मुहूर्त और अन्य श्रेष्ठ योगों में घट स्थापना की जा सकती है:
-
लाभ-अमृत चौघड़िया: सुबह 9:20 से दोपहर 12:13 बजे तक
-
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:50 से दोपहर 12:37 बजे तक
-
धनु लग्न: सुबह 11:32 से दोपहर 1:36 बजे तक
-
शुभ चौघड़िया: दोपहर 1:40 से 3:06 बजे तक
अष्टमी, नवमी और विशेष योग की तिथियां
-
17-18 अक्टूबर: 17 अक्टूबर को पूरे दिन और रात सप्तमी तिथि रहेगी। 18 अक्टूबर को सुबह 8:28 बजे के बाद अष्टमी तिथि शुरू होगी, जिससे रात में अष्टमी पूजन करने वाले श्रद्धालु इसी दिन अपनी पूजा संपन्न कर सकेंगे।
-
19 अक्टूबर (सोमवार): सुबह 10:52 बजे तक अष्टमी रहेगी, जिसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी। इस दिन नवमी पूजन किया जाएगा।
-
अमृत सिद्धि व स्वार्थ सिद्धि योग: 14 अक्टूबर तथा 18-19 अक्टूबर को विशेष स्वार्थ सिद्धि एवं अमृत सिद्धि योग का संयोग रहेगा, जो साधना और नए कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी है।
20 अक्टूबर को विजयदशमी और दशहरा पर्व
मंगलवार, 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे तक नवमी और उसके बाद दशमी तिथि रहेगी। श्रवण नक्षत्र की साक्षी में शमी पूजन, अपराजिता पूजन और विजयदशमी (दशहरा) का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
इस दिन वाहन, आभूषण, सफेद वस्त्र खरीदने तथा नए व्यापार, मशीनरी व मांगलिक कार्यों का शुभारंभ करना बेहद शुभ माना गया है। नवरात्र के इन पावन दिनों में श्रद्धालु विधि-विधान से मां दुर्गा की आराधना करेंगे।

