झुंझुनूं: राम-सीता विवाह से गूंजा रामलीला मैदान: परशुराम और लक्ष्मण के संवाद ने बांधा समां, उमड़े दर्शक
झुंझुनूं (सुमेर सिंह राव): गांधी चौक के ऐतिहासिक रामलीला मैदान पर श्री रामलीला परिषद के तत्वावधान में चल रही 70वीं रामलीला के मंचन के दौरान बुधवार को प्रसंग का सबसे रोमांचक और पावन दृश्य जीवंत हुआ। मंचन में जैसे ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने शिवधनुष का खंडन किया, पूरा पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इसके पश्चात जनकपुर की नगरी में मिथिला नरेश की पुत्री माता सीता ने आगे बढ़कर श्रीराम के गले में वरमाला डाली, जिसे देख दर्शक भावविभोर हो उठे।
परशुराम-लक्ष्मण संवाद और बारात का प्रसंग इस मांगलिक प्रसंग के बीच जब भगवान परशुराम का क्रोधित अवस्था में आगमन हुआ, तो सभा में कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। क्रोधी स्वभाव वाले परशुराम के सामने लक्ष्मण जी के साथ तीखे संवाद हुए, जिसने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। अंततः भगवान श्रीराम के विनम्र आग्रह और शालीनता से परशुराम का क्रोध शांत हुआ और उन्होंने श्रीराम को आशीर्वाद दिया।
इसके बाद जनकपुर के दूत द्वारा अयोध्या पहुंचकर राजा दशरथ को बारात का निमंत्रण देने का दृश्य दिखाया गया। निमंत्रण पाकर राजा दशरथ अत्यंत प्रसन्न हुए और धूमधाम से बारात जनकपुर के लिए रवाना हुई। मंचन में श्रीराम और माता सीता का विवाह विधि-विधान से संपन्न हुआ। इससे पूर्व रावण और बाणासुर के संवाद का भी सुंदर मंचन किया गया।
विशिष्ट अतिथियों का सम्मान कार्यक्रम के संयोजक संजय सैनी ने बताया कि इस अवसर पर श्री रामलीला परिषद के अध्यक्ष प्रमोद खंडेलिया एवं सचिव दिनेश शर्मा द्वारा समाज के विशिष्ट नागरिकों—संजय रानासरिया, अशोक शर्मा, नेमी अग्रवाल, श्रवण कुमार गोयनका और संपत पुरोहित को प्रतीक चिन्ह (स्मृति चिह्न) भेंट कर सम्मानित किया गया।

