पाकिस्तान के शक्तिपीठ से जुड़ी है खैरथल के हिंगलाज माता मंदिर की गाथा; नवरात्र में उमड़ती है भारी भीड़
खैरथल (हीरालाल भूरानी)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित प्रसिद्ध हिंगलाज माता शक्तिपीठ तक हर किसी की पहुंच नहीं है, लेकिन खैरथल वासियों के लिए यह आस्था अब उनके अपने शहर में ही जीवंत है। नगर की पुरानी आबादी के वार्ड संख्या 9 में स्थित प्राचीन हिंगलाज माता मंदिर इन दिनों शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं के आकर्षण और आस्था का मुख्य केंद्र बना हुआ है। नौ दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में प्रतिदिन सैकड़ों भक्त माता के दरबार में माथा टेककर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
विभाजन और नदी से मूर्ति प्रकट होने की अनूठी कहानी
विश्वविख्यात परी माता मंदिर के समीप स्थित यह प्राचीन मंदिर भारत-पाक विभाजन के दौर की उस धार्मिक परंपरा और अटूट आस्था का प्रतीक है, जो आज भी जीवंत है।
मंदिर के पुजारी पुरुषोत्तम पुरी और संजय पुरी ने इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि उनके पूर्वज विभाजन से पहले पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में निवास करते थे। मान्यता के अनुसार, एक दिन नदी में स्नान करते समय उनके पूर्वजों को एक अलौकिक आवाज सुनाई दी। जब वे उस दिशा में गए, तो नदी से हिंगलाज माता की मूर्ति प्रकट हुई, जिस पर गाढ़ा सिंदूर सुशोभित था।
खैरथल में हुई स्थापना, जल रही है अखंड ज्योति
बुजुर्गों— भल्लूपुरी, डॉ. टहलपुरी और डॉ. गोपाल पुरी द्वारा उस पवित्र मूर्ति को ससम्मान खैरथल लाया गया। इसके बाद विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यहां मंदिर की स्थापना की गई। तब से लेकर आज तक यहाँ लगातार पूजा-अर्चना और अखंड ज्योत प्रज्वलित रखने का यह सिलसिला निरंतर जारी है।

