भक्ति, शक्ति, आस्था और सामाजिक एकता का पर्व दुर्गा पूजा आज से शुरू; नवदुर्गा के नौ स्वरूप देंगे जीवन जीने का संदेश
लक्ष्मणगढ़ (अलवर) कमलेश जैन। भक्ति, शक्ति, आस्था, कला और सामाजिक समरसता के अद्भुत संगम का प्रतीक शारदीय नवरात्र उत्सव एवं दुर्गा पूजा पर्व आज से अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हो गया है। अगले नौ दिनों तक मां भगवती के अलग-अलग नौ स्वरूपों (नवदुर्गा) की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। दशमी तिथि को विजयादशमी (दशहरा) के साथ असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की जीत का शाश्वत संदेश दिया जाएगा।
शक्ति उपासना का सबसे बड़ा पर्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर समस्त देवताओं और सृष्टि को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इसलिए यह पर्व केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अन्याय, अत्याचार और अधर्म के अंत का प्रतीक है। मां दुर्गा के हाथों में सुशोभित अस्त्र-शस्त्र यह सिखाते हैं कि शक्ति का सर्वोच्च उद्देश्य कमजोरों की रक्षा और समाज में संतुलन स्थापित करना है।
नवदुर्गा: नौ रूप, नौ जीवन संदेश
नवदुर्गा का प्रत्येक स्वरूप मनुष्य को जीवन में सही दिशा और आध्यात्मिक प्रेरणा देता है:
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मां शैलपुत्री: स्थिरता और दृढ़ता का संदेश
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मां ब्रह्मचारिणी: तप, संयम और अनुशासन
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मां चंद्रघंटा: साहस और वीरता
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मां कूष्मांडा: सृजन और सकारात्मक ऊर्जा
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मां स्कंदमाता: वात्सल्य और ममता
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मां कात्यायनी: न्याय और सत्य निष्ठा
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मां कालरात्रि: भयमुक्ति और निर्भयता
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मां महागौरी: पवित्रता और शांति
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मां सिद्धिदात्री: आध्यात्मिक पूर्णता
नारी शक्ति और सामाजिक एकता का उत्सव
दुर्गा पूजा का यह पावन अवसर समाज में नारी शक्ति के सम्मान का संदेश भी देता है। कन्या पूजन की परंपरा यह स्मरण कराती है कि महिलाओं के प्रति सम्मान और समानता का भाव केवल पूजा-पंडालों तक सीमित न रहकर वास्तविक व्यवहार में भी उतरना चाहिए। इसके साथ ही सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडालों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामाजिक सेवा कार्यों के माध्यम से यह पर्व समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में पिरोने का काम करता है।

