श्री राजर्षि अभय समाज की 111वे वर्ष की रामलीला में राम जन्म से अहिल्या उद्धार तक की लीलाओं का हुआ भव्य मंचन
अलवर / राजस्थान (अनिल कुमार गुप्ता)
लीला का शुभारंभ देवताओं द्वारा अत्याचारों से मुक्ति के लिए भगवान से की गई प्रार्थना के प्रसंग से हुआ।
भए प्रकट कृपाला, दीनदयाला
इसके पश्चात भगवान श्रीराम के जन्म की लीला का मंचन किया गया, जिसने संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भगवान श्रीराम के अवतरण के प्रसंग पर उपस्थित दर्शकों ने श्रद्धा एवं उल्लास के साथ जय श्रीराम के जयघोष किए।
इसके बाद महर्षि विश्वामित्र के अयोध्या आगमन तथा भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ यज्ञ की रक्षा के लिए ले जाने के प्रसंग का मंचन हुआ। वन में प्रभु श्रीराम द्वारा राक्षसी ताड़का के वध की लीला ने धर्म की अधर्म पर विजय का संदेश दिया। आगे बढ़ते हुए भगवान श्रीराम द्वारा श्रापग्रस्त माता अहिल्या का उद्धार करने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया, जिसमें प्रभु की करुणा, कृपा और भक्तवत्सल स्वरूप का सुंदर चित्रण देखने को मिला।
रामलीला के अगले प्रसंग में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के महर्षि विश्वामित्र के साथ जनकपुरी पहुंचने तथा वहां विश्राम करने की लीला का मंचन किया गया। सभी प्रसंगों को कलाकारों ने अपने अभिनय एवं संवादों के माध्यम से जीवंत रूप प्रदान किया। दर्शकों ने रामलीला के प्रत्येक प्रसंग का श्रद्धा और उत्साह के साथ आनंद लिया।
राजर्षि अभय समाज के प्रचार मंत्री देवराज शर्मा ने बताया कि समाज की ओर से आयोजित यह 111वें वर्ष की रामलीला क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, धर्म, मर्यादा, सत्य और सदाचार के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

